12.1.11

हिन्दी भारत का प्राण है..

जन-जन जब अपनाए हिन्दी
नवजीवन तब पाए हिन्दी।।

अंग्रेजी की छोड़ गुलामी, भारत माता की सन्तान,
अपनी भाषा ही अपनाएं, यही बढ़ाएगी सम्मान।
किंबहुना परिलक्षित है ये,राष्ट्रीय एकता लाए हिन्दी..

अंग्रेजों को मार भगाया, अब अंग्रेजी मार भगाएं,
राष्ट्रदेवता के चरणों में, नितप्रति हिन्दी सुमन चढ़ाएं।
अंग्रेजी वर्चस्व मिटाएं, अब ना ठोकर खाए हिन्दी..

यह कैसी बन गई समस्या, कैसी दुखपूर्ण घड़ी आई,
जिसको हम कहते हैं माता, अपने ही घर मृत पाई।
आओ मां के आंसू पौछें, अब ना अश्रु बहाए हिन्दी..

64 साल हो गए अब तो, हे सरकारी तंत्र चेत जा,
हिन्दी भाषी को महत्व देकर, हे सरकारी मंत्र चेत जा।
सभी काम हिन्दी में हो, हिन्दी दिवस मनाए हिन्दी..

हिन्दी दिवस सभी तो सार्थक, जब हिन्दी अपनाएं हम,
हिन्दी के ही लिए जीयें और हिन्दी हित मर जाएं हम।
नव्वे प्रतिशत हिन्दी भाषी, फिर भी क्यों सरमाये हिन्दी..

हिन्दुस्तान में हिन्दी दिवस, यह हिन्दी का अपमान है,
भारत हिन्दी, हिन्दी भारत, हिन्दी भारत का प्राण है।
हम भारत के प्राण बचाएं, रग-रग में बस जाए हिन्दी..

2 comments:

हिन्दी के लिक्खाड़ said...

जी हां, हिन्दी भारत का प्राण है..

भारतीय ब्लॉग लेखक मंच said...

बहुत सुन्दर कविता. www.upkhabar.in/ पर आपका स्वागत है .